*तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्म निर्देशक भारतीराजा का 85 वर्ष की उम्र में निधन*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्म निर्देशक भारतीराजा का 85 वर्ष की उम्र में निधन*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) तमिल सिनेमा के दिग्गज फिल्म निर्देशक भारतीराजा का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है । वे पिछले काफी समय से सांस की तकलीफ और उम्र संबंधी अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे। चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। इस दु:खद खबर का संक्षिप्त विवरण देखें तो दिग्गज निर्देशक भारतीराजा लंबे समय से बीमार चल रहे थे और बढ़ती उम्र की स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण चेन्नई में उनका निधन हो गया। उनका सिनेमा में योगदान देखें तो तमिल सिनेमा में उन्हें 'निर्देशक इमयम' (निर्देशन का स्तंभ) कहा जाता है। उन्होंने फिल्मों में शहरी कहानियों के दौर को बदलकर ग्रामीण परिवेश,मिट्टी और आम लोगों की भावनाओं को बड़े पर्दे पर जीवंत किया। पिछले वर्ष (मार्च 2025) में उनके बेटे और अभिनेता- निर्देशक मनोज भारतीराजा का मात्र 48 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया था। जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा था। उनके निधन पर दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की है कि उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। पी.भारतीराजा (P. Bharathiraja) का फिल्मी करियर भारतीय सिनेमा विशेषकर तमिल फिल्म उद्योग में बेहद क्रांतिकारी और युगांतरकारी माना जाता है। उन्हें तमिल सिनेमा को स्टूडियो के बंद कमरों और बनावटी सेटों से बाहर निकालकर असली गांवों और प्राकृतिक लोकेशंस पर ले जाने का श्रेय दिया जाता है।


 इसी वजह से उन्हें ''इयक्कुनर इमयम'' (Iyakkunar Imayam -निर्देशकों का शिखर की उपाधि दी गई थी। उनके चार दशक से अधिक लंबे करियर की मुख्य उपलब्धियां,फिल्में और पुरस्कार देखें तो उनके यादगार निर्देशन और शुरुआती दौर जाने तो उनकी धमाकेदार शुरुआत (1977) में हुई उन्होंने साल 1977 में फिल्म ''16 वयाथिनिले'' (16 Vayathinile) से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में कमल हासन, श्रीदेवी और रजनीकांत मुख्य भूमिकाओं में थे और यह फिल्म तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी माइलस्टोन मानी जाती है। उनकी शानदार तमिल फिल्में देखें तो उन्होंने 40 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी मशहूर फिल्मों में ''किझाके पोगुम रेल'',''सिगप्पु रोजक्कल''(एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर),''अलैगल ओइवथिल्लई'', ''मुधल मरियाथाई'' और ''वेधम पुधिधु'' (जातिगत भेदभाव पर गहरी चोट) शामिल हैं। उन्होंने बॉलीवुड (हिंदी) में काम किया भारतीराजा ने हिंदी सिनेमा में भी कदम रखा था। उन्होंने श्रीदेवी और अमोल पालेकर के साथ ''सोलवा सावन''(1979),राजेश खन्ना और पूनम ढिल्लों के साथ ''रेड रोज'' (1980) और ''सवेरे वाली गाड़ी''(1986) जैसी बॉलीवुड फिल्मों का निर्देशन किया। उनके आखरी निर्देशन में एक निर्देशक के तौर पर उनकी आखिरी फिल्म''मींडम ओरु मारियाथाई'' थी। जो साल 2020 में रिलीज हुई थीं। उनका बेहतरीन अभिनय (Acting Career) भी था। एक शानदार निर्देशक होने के साथ-साथ वे एक मंझे हुए अभिनेता भी थे। उन्होंने कई फिल्मों में यादगार सहायक और मुख्य भूमिकाएं निभाईं । उन्होंने मणिरत्नम की फिल्म ''आयुध एझुथु'', इसके अलावा ''पांडियनाडु'', ''थिरुचित्रम्बलम'' और हाल ही में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ''महाराजा'' (2024) में शानदार काम किया था। वह नए टैलेंट को मौका देने की मशीन थी। भारतीराजा को फिल्म इंडस्ट्री में नए चेहरों को खोजने और उन्हें स्टार बनाने के लिए जाना जाता था। उन्होंने राधा, रेवती,राधिका,कार्तिक और विजयशांति जैसे कई दिग्गज कलाकारों को सिनेमा जगत में पहला ब्रेक दिया। उनकी एक दिलचस्प खासियत थी कि वे अपनी फिल्मों की मुख्य अभिनेत्रियों (Lead Actresses) का फिल्मी नाम अक्सर ''R'' अक्षर से शुरू करते थे । जैसे- राधिका,राधा,रेवती,रेखा,रंजीता।


 उनके असिस्टेंट के तौर पर काम सीखकर आगे चलकर के.भाग्यराज और मणिवन्नन जैसे लोग भी बड़े निर्देशक बने। उनके राष्ट्रीय और नागरिक सम्मान देखें तो उनकी बेहतरीन कला के लिए उन्हें देश-विदेश में कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया था। पद्म श्री (2004) भारत सरकार ने साल 2004 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया था। 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) उन्होंने अलग-अलग श्रेणियों में 6 बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। उन्हें ''सीताकोका चिलाका'' (तेलुगु),''मुधल मरियाथाई'' (तमिल),'वेधम पुधिधु'',''करुथम्मा'', ''अंथिमनथारई'' और ''कदल पूकल'' (सर्वश्रेष्ठ पटकथा) के लिए नेशनल अवार्ड मिला। इसके अलावा उन्होंने 4 फिल्मफेयर अवार्ड्स (साउथ) और 6 तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार भी अपने नाम किए थे। भारतीराजा का सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय समाज और ग्रामीण जीवन का एक जीता-जागता आईना था।

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