*बिते जमाने की लोकप्रिय अभिनेत्री इंदिरा कौर नहीं रहीं*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*बिते जमाने की लोकप्रिय अभिनेत्री इंदिरा कौर नहीं रहीं*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】बिते जमाने की बोलीवुड की लोकप्रिय व दिग्गज अभिनेत्री इंदिरा कौर अब हमारे बीच नहीं रही हैं। जिन्हें उनकी खूबसूरत नीली आंखों की वजह से उनको इंडस्ट्री ने इंदिरा कौर को "इंदिरा बिल्ली" नाम दिया था। इंदिरा के निधन के बाद इंदिरा के परिवार ने उनके लिए 16 जून को एक प्रार्थना सभा रखी थी। जिस पर लिखा था कि एक प्यारी पत्नी,मां,बहन और दादी की याद में। गहरे दु:ख के साथ हम अपनी प्रिय श्रीमती इंदिरा शिव मेहरा के निधन की खबर साझा करते हैं। इंदिरा कौर बिल्ली पंजाबी और हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री थीं। उन्होंने उर्दू, हिंदी और पंजाबी भाषा की करीब 50 से उपर फिल्मों में काम किया था। इंदिरा कौर का जन्म पंजाब के गुरदासपुर में 6 अगस्त 1936 में हुआ था। साल 1947 में बंटवारे के बाद उनका परिवार यूपी के कानपुर के रेफ्यूजी कैंप में रहने लगा था। 

साल 1952 में मुंबई में इंदिरा का परिवार बस गया था। बिल्ली (इंदिरा कौर) 1980 और 1990 के दशक की बॉलीवुड की एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं । जो मुख्य रूप से बी-ग्रेड फिल्मों व कॉमेडी शैली की फिल्मों में दिखाई दीं थी। उनकी कुछ प्रमुख फिल्में निम्नलिखित हैं। बिल्ली (इंदिरा कौर) की प्रसिद्ध फिल्मों में "प्यार की जीत" (1987), "पत्थर के इंसान" (1989), "गुंडा राज" (1995),"आग ही आग (1994),"आँखें,(1993), "खलनायक"(1993) इसमें उन्होंने एक छोटी भूमिका निभाई थी। "जान से प्यारा" (1992), "अंधा कानून" (1996), हमसे बढकर कौन?" (1995) और "जीना मरना तेरे संग" (1992) । बिल्ली को उनकी अल्डहड भूमिकाओं और एक्सप्रेसिव एक्टिंग के लिए जाना जाता था हालांकि उन्हें मुख्यधारा की बड़ी फिल्मों में बड़ा ब्रेक नहीं मिला। साल 1990 के दशक के अंत तक उन्होंने फिल्मों से संन्यास ले लिया।

 इंदिरा कौर जिन्हें इंदिरा बिल्ली के नाम से जाना जाता है। उन्होंने  कई हिंदी और पंजाबी फिल्मों में काम किया। उनकी पहली और दूसरी फिल्म को लेकर थोड़ी जानकारी देखे तो पंजाबी फिल्मों में इंदिरा बिल्ली को पंजाबी सिनेमा में ''यमला जट'' (1960) से बड़ी पहचान मिली थी। इसके बाद उन्होंने ''दो लछियां'' (1960) और ''हीर स्याल'' (1960) जैसी सफल फिल्मों में काम किया था इसलिए अगर हम उनकी पंजाबी फिल्मों की बात करें तो ''यमला जट'' को अक्सर उनकी पहली बड़ी पंजाबी फिल्म माना जाता है और ''दो लछियां'' उनकी शुरुआती सफल फिल्मों में से एक थी।

 हिंदी- उर्दू फिल्मों में विकिपीडिया के अनुसार इंदिरा बिल्ली की सबसे शुरुआती हिंदी व उर्दू फिल्मों में ''श्री गणेश महिमा'' (1950) (जिसमें उन्होंने रुक्मिणी का किरदार निभाया था) और भगवान दादा की ''रंगीला'' (1953) शामिल हैं। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में छोटे रोल भी किए थे। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इंदिरा बिल्ली ने पंजाबी फिल्मों में कदम रखने के बाद ही मुख्य अभिनेत्री के रूप में बड़ी सफलता हासिल की थी। जबकि हिंदी फिल्मों में उन्होंने सहायक या छोटे रोल भी किए थे। उनकी शुरुआत की दौर की फिल्में देखें तो "चक्रधारी", "स्री","पटरानी", "आया तूफान" दारासिंह के साथ,उनकी सुपरडूपर हीट फिल्म "जंगल की दूनिया", "आवारा बादल","बहादुर डाकु","राका","बागी सरदार" और उनकी आखरी फिल्म "पटोला" थी। इतनी के बाद हम उनको अपनी श्रद्धांजलि देते है।【Photos Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Young Fox News•News Channel•#फिल्मी दुनिया#अभिनेत्री# इंदिरा बिल्ली# निधन


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