*बॉलीवुड का इनविज़िबल मैन: कैसे एक गुजराती किलर ने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया और 12 साल तक सबको बेवकूफ बनाया*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*बॉलीवुड का इनविज़िबल मैन: कैसे एक गुजराती किलर ने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया और 12 साल तक सबको बेवकूफ बनाया*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 



(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) मर्डर केस में 12 साल से फरार उम्रकैद का कैदी निकला फिल्म ऐक्टर गुजरात से हुआ गिरफ्तार। गुजरात पुलिस ने 2005 के मर्डर केस में हेमंत मोदी उर्फ वैष्णव को गिरफ्तार किया है। हेमंत, 'ठग्स ऑफ हिंदुस्तान' और 'जयेशभाई ज़ोरदार' जैसी फिल्मों में काम कर चुका है। उसे साल 2008 में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी और साल 2014 में 30-दिन की पैरोल मिली थी हालांकि वह पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद जेल वापस नहीं लौटा। दरअसल गुजराती वैष्णव समाज का हेमंत नगिनदास पुरुषोत्तमदास मोदी कौन है? गुजरात का एक सजायाफ्ता कातिल, जो 12 साल तक "मेट्रो इन दीनो" और "जयेशभाई जोरदार"  जैसी फिल्मों में एक्टिंग करते हुए छिपा रहा पर सिर्फ एक टिप-ऑफ के बाद पकड़ा गया। गुजरात का एक सजायाफ्ता कातिल 12 साल तक भागता रहा,परछाई में नहीं बना बल्कि फिल्म की लाईमलाइट में खड़ा रहा। एक नकली नाम से एक्टिंग करते हुए हेमंत मोदी ने अमिताभ बच्चन,आमिर खान,रणवीर सिंह और मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल के साथ स्क्रीन शेयर की । इससे पहले कि एक टिप-ऑफ पुलिस को आखिरकार उसके दरवाज़े तक ले आए। एक दशक से ज़्यादा समय से गुजरात का मोस्ट वांटेड आदमी ग्रिड से दूर नहीं रह रहा था। वह ग्रिड पर जी रहा था। स्क्रीन पर,थिएटर में और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर । जबकि उसके सिर पर वारंट लटका हुआ था। साल 2014 में जेल से गायब हुए आदमी को आखिरकार गुरुवार को अहमदाबाद की डिटेक्शन ऑफ़ क्राइम ब्रांच (DCB) ने गिरफ्तार कर लिया। जिससे भारतीय क्रिमिनल इतिहास में गायब होने के सबसे बड़े मामलों में से एक का अंत हो गया। एक मर्डर,एक सज़ा, और एक गायब होने का मामला देखें तो हेमंत नगिनदास पुरुषोत्तमदास मोदी को साल 2008 में 15 जून 2005 को नरेंद्र उर्फ़ नैनो यशवंत कांबले के मर्डर के लिए दोषी ठहराया गया था। अपने भाई सचिन मोदी और पाँच अन्य लोगों के साथ उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। उसने लगभग छह साल सज़ा काटी । पहले साबरमती सेंट्रल जेल में फिर मेहसाणा जेल में जहाँ उसे सिर्फ़ कैदी नंबर 31146 के नाम से जाना जाता था। 25 जुलाई, 2014 को गुजरात हाई कोर्ट ने उसे 30 दिन की पैरोल दी। वह बाहर चला गया और फिर कभी वापस नहीं आया और नया नाम, नई ज़िंदगी, रोशनियाँ के साथ जिने लगा। देश छोड़कर भागने या गुमनामी में खो जाने के बजाय हेमंत ने कुछ ज़्यादा ही हिम्मत वाला काम किया। पहले वह लगभग एक साल तक पाटण ज़िले में रहे फिर खुद को पूरी तरह से बदल लिया और ट्विंकल मुकुंद दवे नाम अपनाया। अहमदाबाद चले गए और एक कॉर्पोरेट नौकरी कर ली लेकिन स्पॉटलाइट का खिंचाव ज़्यादा मज़बूत साबित हुआ। उन्होंने थिएटर की ओर रुख किया फिर मुंबई पर नज़रें गड़ा दीं। बॉलीवुड के बड़े इकोसिस्टम में। जहाँ रोज़ाना सैकड़ों बैकग्राउंड आर्टिस्ट और जूनियर एक्टर सेट पर आते-जाते रहते हैं। एक नए चेहरे पर ज़्यादा शक नहीं होता। "स्पंदन मोदी"  के तौर पर खुद को रीब्रांड करके हेमंत ने चुपचाप एक काम करने वाले एक्टर का करियर बनाया। इंडियन सिनेमा के सबसे बड़े नामों के साथ सेट पर ये रोल भूली-बिसरी फ़िल्मों में कैमियो रोल नहीं थे। पुलिस के मुताबिक हेमंत "ठग्स ऑफ़ हिंदोस्तान" में दिखे थे । यह साल 2018 की ब्लॉकबस्टर फ़िल्म थी। जिसमें अमिताभ बच्चन और आमिर खान थे। उन्होंने रणवीर सिंह और बोमन ईरानी की" जयेशभाई जोरदार"में भी काम किया और हाल ही में आदित्य रॉय कपूर और सारा अली खान के साथ "मेट्रो… इन दिनों" में भी। सबसे खास बात यह है कि पुलिस का कहना है कि सुपरस्टार मोहनलाल की हाई-प्रोफाइल मलयालम एक्शन फिल्म" L2: एम्पुरान"  में उनका रोल है। वह आने वाले प्रोडक्शन "लाहौर 1947" और" तू है मेरी किरण"  से भी जुड़े थे। बॉलीवुड के अलावा उन्होंने लगभग 20 गुजराती फिल्में, कई टीवी सीरियल,वेब सीरीज "तस्करी"  और 17 गुजराती स्टेज प्ले किए । जिनमें "युगपुरुष"और "गांधी विरुद्ध गोडसे" जैसे मशहूर प्रोडक्शन शामिल हैं। दिखाई देते हुए गायब होने की कला मिस्टर एक्स बनकर अपनाई। उनका तरीका लगभग उल्टा चालाक था। हेमंत ने परिवार और दोस्तों से कॉन्टैक्ट खत्म कर दिया था। अपनी पत्नी को तलाक दे दिया और सोशल मीडिया पर लगभग ज़ीरो प्रेजेंस बनाए रखा था। ऐसे ज़माने में जब डिजिटल फुटप्रिंट्स सबको दिखा देते हैं । ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से उनकी लगभग पूरी तरह गैर-मौजूदगी ने उन्हें इन्वेस्टिगेटर्स के लिए गायब कर दिया था। जबकि ऑडियंस उन्हें परफॉर्म करते हुए देख रही थी हालांकि एक अजनबी ने याद करके उन्हें पकड़वा दिया। उनका यह सब हैरानी की बात है कि लो-टेक था। हेमंत साल 2025 में अहमदाबाद लौट आए थे। शायद एक दशक से ज़्यादा आज़ादी के बाद कॉन्फिडेंट होकर। दौरान किसी ने उन्हें पहचान लिया और उसने पुलिस को खबर दे दी। ऑफिसर्स ने जेल रिकॉर्ड्स के साथ उसके फिजिकल डिस्क्रिप्शन को क्रॉस-रेफरेंस किया। यह बिल्कुल मैच कर गया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अब जांच कर रही है कि उसे इतने लंबे समय तक छिपे रहने में किसने मदद की और कैसे एक दोषी हत्यारा बिना किसी के सही सवाल पूछे भारत के कुछ सबसे बड़े फिल्म सेट पर चला गया। (Photos Courtesy Social media)

~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Young Fox Filmi News•Digital World•


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