*फिल्म-मालिक-की समीक्षा: राजकुमार राव का उल्लेखनीय अभिनय बेढंगे और घटिया लेखन के कारण बेकार हो गया*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*फिल्म-मालिक-की समीक्षा: राजकुमार राव का उल्लेखनीय अभिनय बेढंगे और घटिया लेखन के कारण बेकार हो गया*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】फिल्म "मालिक" 80 के दशक के उत्तर प्रदेश की कहानी है। जब माफिया और स्थानीय गैंगस्टरों का राज था,रेत तस्करी,गैंगवार और क्रूर हत्याओं सहित अवैध कारोबार आम बात थी। यह फ़िल्म एक किसान के बेटे दीपक (राजकुमार राव) की कहानी है। जो अपने पिता के स्वामी (मालिक) के आगे न झुकने के कारण परिवार को झेलने वाले परिणामों के बाद सत्ता और प्रसिद्धि प्राप्त करना ही अपने जीवन का लक्ष्य समझता है। दीपक पूरी ताकत लगाने का फैसला करता है और अपने पिता की चोटों के लिए ज़िम्मेदार अपनी पहली हत्या करके बदला लेता है। एक आम मध्यमवर्गीय किसान का बेटा खुद को ''मालिक''कहता है और सभी अवैध धंधों में अपना दबदबा कायम करता है। एक शक्तिशाली,निर्दयी और महत्वाकांक्षी गैंगस्टर के रूप में उभरता है। उसे पुलिस या राजनेताओं का कोई डर नहीं है। जैसे-जैसे मालिक अपराध,भ्रष्टाचार और सत्ता की दुनिया में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ता जाता है। उसके कई दुश्मन बनते जाते हैं । जिनमें मंत्री शंकर सिंह (सौरभ शुक्ला),विधायक बलहार सिंह (स्वानंद किरकिरे) और धंधे में उसका प्रतिद्वंद्वी चंद्रशेखर (सौरभ सचदेवा) शामिल हैं। भ्रष्ट प्रशासन 98 मुठभेड़ों के लिए मशहूर एसपी प्रभु दास (प्रसेनजीत चटर्जी) को उसका शिकार बनाने के लिए नियुक्त करता है। क्या राजनेता मालिक के उभरते प्रभुत्व को रोक पाएँगे? क्या एसपी प्रभु दयाल उसे पकड़ने में कामयाब हो पाएँगे? फिल्म में जानिए। "मालिक" राजकुमार राव को एक ऐसे अवतार में पेश करती है । जो पहले कभी नहीं देखा गया। फिल्म में कई बेहतरीन पल हैं । जो इसे आम दर्शकों के लिए एक मनोरंजक फिल्म बनाते हैं। अनुज राकेश धवन का यथार्थवादी कैमरा वर्क पृष्ठभूमि के साथ बखूबी मेल खाता है। केतन सोढ़ा का बैकग्राउंड स्कोर सराहनीय है और यह गैंगस्टर ड्रामा के अनुभव को और भी बेहतर बनाता है। "मालिक" असंगत लेखन और पटकथा से ग्रस्त है हालाँकि फिल्म की शुरुआत अच्छी होती है लेकिन दूसरे भाग में इसकी गति धीमी हो जाती है। जो आपके धैर्य की परीक्षा लेगी। इसमें औसत दर्जे के गाने हैं। जिनमें एक आइटम नंबर भी शामिल है । जो कहानी को रोक देता है और कहानी को आगे नहीं बढ़ाता। निर्देशक और सह-लेखक पुलकित ने ज्योत्सना नाथ के साथ मिलकर गैंगस्टर फिल्मों के पारंपरिक ढर्रे पर ही काम किया हैं और कुछ भी नया नहीं पेश किया हैं।  एक बड़ी कमी यह है कि एक बेहतरीन स्टार कास्ट होने के बावजूद राजकुमार राव के सामने एक योग्य और मज़बूत प्रतिद्वंदी का न होना। दांव कभी ज़्यादा नहीं लगते। जिससे यह एक आम एक्शन-ड्रामा बन जाती है और ऐसी फ़िल्म नहीं जिसकी आप उम्मीद करते हैं। इसके अलावा इसका क्लाइमेक्स बेहद औसत है । जो एक ज़बरदस्त क्राइम एक्शन फ़िल्म की आपकी चाहत को पूरा नहीं करता। फिल्म "मालिक” में अभिनय दृष्टि से देखें तो राजकुमार राव ने एक बार फिर अपने अभिनय कौशल का परिचय दिया है। वह अपने किरदार में पूरी तरह डूबे हुए नज़र आते हैं और एक और दमदार अभिनय देते हैं। काफ़ी हद तक उनका अभिनय फ़िल्म को तब तक बाँधे रखता है जब तक कि सहायक कलाकार अपनी भूमिका में नहीं आ जाते। राव के अलावा अंशुमान पुष्कर अपनी बेहतरीन भूमिका में कमाल करते हैं। सौरभ शुक्ला, प्रोसेनजीत चटर्जी और सौरभ सचदेवा को कुछ ख़ास नहीं मिला हालाँकि वे अपनी भूमिकाओं में अच्छे थे। स्वानंद किरकिरे का अभिनय दर्शकों को बांधे रखता है। दीपक की पत्नी का किरदार निभाने वाली मानुषी छिल्लर ने दमदार अभिनय किया है लेकिन उनके दृश्यों को बेहतर लेखन की ज़रूरत है। "मालिक" अपने कुछ पलों के साथ एक अच्छी मनोरंजक फ़िल्म है लेकिन इसकी लेखनी कमज़ोर है। अगर निर्माताओं ने पटकथा पर थोड़ा और काम किया होता तो यह गैंगस्टर शैली में एक मज़बूत कड़ी बन सकती थी। राजकुमार राव का एक्शन फ़िल्मों में प्रवेश औसत रहा। फिल्म का नाम: "मालिक" निर्देशक: पुलकित। कलाकार: राजकुमार राव, मानुषी छिल्लर, प्रोसेनजीत चटर्जी, सौरभ शुक्ला और अन्य। लेखक: पुलकित, ज्योत्सना नाथ। इस फिल्म को रेटिंग: 2.5/5 मिला है।फोटो: साभार: टिप्स फिल्म्स। इस फिल्म ने पहले दिन 4 करोड से उपर की कमाई की थी।

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Young Fox News• #फिल्म# मालिक# राजकुमार राव#मानुषी छिल्लर

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