*नोलन की महाकाव्य फिल्म 'द ओडिसी': सिनेमा के इतिहास को बदलती एक दृश्यात्मक पौराणिक गाथा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*नोलन की महाकाव्य फिल्म 'द ओडिसी': सिनेमा के इतिहास को बदलती एक दृश्यात्मक पौराणिक गाथा*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

(मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई)रॉटेन टोमैटोज़ पर 96% की रेटिंग,पूर्ण रूप से आईमैक्स में चित्रित,मैट डेमन की अगुआई वाला स्टार-स्टडेड कलाकार यह 3 घंटे की यह फिल्म आधुनिक महाकाव्यों को किस प्रकार नई परिभाषा देती है। क्रिस्टोफर नोलन ने एक बार फिर सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया है। उनकी नवीनतम फिल्म''द ओडिसी''केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक घटना बनकर उभरी है। प्राचीन यूनानी कवि होमर के इसी नाम के महाकाव्य पर आधारित यह भव्य फिल्म,अपने अभूतपूर्व विस्तार, नवीन तकनीकी प्रयोगों और गहन मानवीय संवेदनाओं के कारण 21वीं सदी की''ब्लॉकबस्टर''फिल्मों की परिभाषा को पूरी तरह से बदल रही है। यह फिल्म 18 जुलाई 2026 को विश्व स्तर पर रिलीज़ होने के लिए पूरी तरह तैयार है और लंदन तथा मुंबई में हुए शुरुआती प्रीमियर के बाद इसकी समीक्षाएँ अब तक की सबसे शानदार रही हैं। कहानी का सार जाने तो फिल्म तीन हजार साल पुरानी''घर वापसी''की यात्रा पर आधारित है। फिल्म''द ओडिसी''महाकाव्य के मूल केंद्र ''घर वापसी''(Homecoming) को बेहद सटीकता से पकड़ती है। कहानी ट्रोजन युद्ध (Trojan War) की समाप्ति के बाद शुरू होती है। युद्ध में विजयी होने के बावजूद यूनानी नायक और इथाका का राजा ओडीसियस (Odysseus मैट डेमन) विजय का जश्न नहीं मना पाता बल्कि वह एक खतरनाक और अज्ञात यात्रा पर निकल पड़ता है। जो उसे उसके घर और परिवार से दूर ले जाती है। इस यात्रा में उसे निम्नलिखित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है । पौराणिक प्राणियों की परीक्षा के मद्देनजर देखें तो एक आँख वाला दैत्य (साइक्लोप्स),जादूगरनी सर्सी (Circe)और समुद्री अप्सराएँ (सायरन) जो अपने मधुर गीतों से नाविकों को भटकाती हैं। देवताओं का क्रोध को लेकर समुद्र के देवता पोसाइडन (Poseidon) ओडीसियस से इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि उसने उनके पुत्र की आँख फोड़ दी थी। जिसके कारण वह पूरी यात्रा में उसे श्राप देते हैं। समय के अंतराल के मद्देनजर यह खतरनाक वापसी यात्रा पूरे दस वर्षों तक चलती है। इस बीच इथाका द्वीप पर ओडीसियस की पत्नी पेनेलोप (Penelope  ऐनी हैथवे) और अब वयस्क हो चुका उनका पुत्र टेलीमेकस (Telemachus टॉम हॉलैंड) एक कठिन परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। राजमहल पर कई अहंकारी और लालची राजकुमारों (प्रेमी-पुरुषों) ने कब्ज़ा कर लिया है। जो पेनेलोप से विवाह करके राजगद्दी हथियाना चाहते हैं। फिल्म इन दोनों कथानकों ओडीसियस का संघर्षपूर्ण सफर और उसके घर पर मंडराता संकट को बारी-बारी से दिखाती है, जिससे कहानी में अद्भुत तनाव पैदा होता है। नोलन ने इस प्राचीन गाथा को एक आधुनिक भावना से जोड़ा है ।''अपराधबोध''(Guilt) की भावना। उनका ओडीसियस कोई आदर्श या बेदाग नायक नहीं है बल्कि एक थका हुआ बूढ़ा और युद्ध में अपने साथियों को बचाने में असफल रहने के ग्लानि से दबा हुआ इंसान है। फिल्म में पात्र आधुनिक अमेरिकी अंग्रेजी (Modern American English) में बात करते हैं। जिससे दर्शक तीन हजार साल पुराने इन पात्रों की भावनाओं से सीधे जुड़ सकते हैं। दृश्यात्मक क्रांति के मद्देनजर फिल्म निर्माण तकनीक का महाकाव्य' उन्नयन है। ''द ओडिसी''तकनीकी दृष्टि से सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर है। पूर्ण-रूप से आईमैक्स (IMAX) में चित्रित हैं । यह पहली ऐसी फीचर फिल्म है। जिसे पूरी तरह से आईमैक्स कैमरों से शूट किया गया है। इस फिल्म की वास्तविक स्थानों पर शूटिंग हुई है। फिल्म की टीम ने 91 दिनों तक ग्रीस,इटली,मोरक्को,आइसलैंड और स्कॉटलैंड सहित छह देशों में यथार्थ स्थानों (Real Locations) पर शूटिंग की गई ताकि दर्शकों को असली दुनिया का कच्चापन और भव्यता दिखाई जा सके। लागत और अवधि के हिसाब से देखें तो इस फिल्म का निर्माण खर्च लगभग 2.5 से 3 अरब डॉलर (करीब 2500-3000 करोड़ रुपये) है और इसकी कुल लंबाई 2 घंटे 53 मिनट (173 मिनट) है। सितारों की सेना देखें तो शानदार कलाकारों ने सजाया महाकाव्य है। नोलन ने इस फिल्म के लिए एक अद्भुत स्टार-कास्ट इकट्ठी की है । मैट डेमन (Matt Damon) – ओडीसियस (Odysseus) ऐनी हैथवे (Anne Hathaway) – पेनेलोप (Penelope)। टॉम हॉलैंड (Tom Holland) – टेलीमेकस (Telemachus)। रॉबर्ट पैटिंसन (Robert Pattinson) – अंतिनस (Antinous – मुख्य विद्रोही प्रेमी)।चार्लीज़ थेरॉन (Charlize Theron) – कालिप्सो (Calypso – अप्सरा)। ज़ेंडेया (Zendaya) – (भूमिका अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं)। इसके अलावा ल्यूपिटा न्योंग'ओ (Lupita Nyong'o),सामंथा मॉर्टन (Samantha Morton) और एलियट पेज (Elliot Page) जैसे दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। समीक्षाएँ और विवाद के हिसाब से देखा जाए तो विरोधाभासों से निकली ''शानदार''जीत। शुरुआत में फिल्म के किरदारों के चयन जैसे ल्यूपिटा न्योंग'ओ का हेलन के रूप में चुना जाना उसको लेकर काफी बहस और विवाद हुए थे लेकिन 6 जुलाई को लंदन प्रीमियर के बाद राय पूरी तरह से बदल गई । दौरान रॉटेन टोमैटोज़ (Rotten Tomatoes) ताजगी का स्कोर 96% मिला है। जो नोलन के करियर का अब तक का सर्वोच्च स्कोर है। मेटाक्रिटिक (MetaCritic): औसत अंक 88। मीडिया की प्रशंसा के मद्देनजर''द डेली टेलीग्राफ''ने इसे"वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फिल्म"करार दिया। जबकि''द टाइम्स''ने लिखा "हर दृष्टि से यह एक कृति है"। नोलन की''द ओडिसी''सिर्फ एक प्राचीन कहानी का आधुनिक रूपांतरण नहीं है बल्कि यह फिल्म निर्माण की सीमाओं को लांघती एक तकनीकी चुनौती है और साथ ही वीरतापरिवार,घर तथा मानवीय नियति पर एक गहन दार्शनिक विमर्श है। इस फिल्म ने साबित कर दिया है कि डिजिटल प्रभावों (VFX) के इस दौर में भी यथार्थ स्थानों पर शूटिंग और मानवीय संवेदनाएँ ही एक अमर सिनेमाई अनुभव दे सकती हैं। क्रिस्टोफर नोलन की ''द ओडिसी''ने ब्लॉकबस्टर फिल्म निर्माण की परिभाषा बदल दी है। क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ''द ओडिसी''उनकी अनूठी फिल्म निर्माण शैली को दर्शाती है।  जिसमें भव्यता और व्यक्तिगत कहानी कहने का अनूठा संगम है। सितारों से सजी यह फिल्म ओडीसियस की यात्रा के माध्यम से अहंकार और मुक्ति जैसे विषयों को उजागर करती है। बदलते सिनेमा जगत में नोलन की यह कृति दर्शकों को सिनेमा की शक्ति और बदलाव की संभावनाओं की याद दिलाती है और अराजकता के बीच आशा की किरण जगाती है। "द ओडिसी"ट्रोजन युद्ध के बाद ओडीसियस की लंबी,खतरों से भरी घर वापसी की यात्रा के बारे में होमर की महाकाव्य कविता ने सदियों से अनगिनत राय और व्याख्याओं को प्रेरित किया है। जब कोई रिव्यूअर कहता है कि काम “एक बड़ा बदलाव लेता है और इसका फ़ायदा होता है”तो वे आम तौर पर कुछ खास कहानी और स्टाइल के विकल्पों की ओर इशारा कर रहे होते हैं जो हिम्मत वाले लगते हैं फिर भी आखिर में एक दमदार,दिल को छूने वाली कहानी देने में कामयाब होते हैं।“बड़ा बदलाव”आम तौर पर किस चीज़ का मतलब होता है। कविता का पहलू यह एक हिम्मत वाला कदम क्यों है। इसका फ़ायदा कैसे होता है। नॉन-लीनियर कहानी"द ओडिसी"समय में आगे-पीछे कूदती है। खासकर शुरुआती किताबों में जहाँ ओडीसियस फेशियन लोगों को अपने एडवेंचर के बारे में बताता है। पुराने ज़माने के दर्शक ज़्यादा सीधी-सादी,लीनियर कहानियों के आदी थे। यह स्ट्रक्चर पढ़ने वालों को हीरो के कैरेक्टर को धीरे-धीरे समझने में मदद करता है। जिससे सस्पेंस और गहरी हमदर्दी पैदा होती है। कई नज़रिए हालांकि ओडीसियस सेंट्रल कैरेक्टर है। हम कहानी को पेनेलोप,टेलीमेकस और यहां तक ​​कि चाहने वालों की नज़र से भी देखते हैं। सेकेंडरी कैरेक्टर्स को आवाज़ देना एपिक पोएट्री के लिए असामान्य था। जिसमें ट्रेडिशनली एक ही हीरो को महिमामंडित किया जाता था। यह दुनिया को बेहतर बनाता है। ओडीसियस की गैरमौजूदगी का उसके घर और किंगडम पर पड़ने वाले असर को दिखाता है। दैवीय और सांसारिक का मिश्रण के हिसाब से देवता सीधे दखल देते हैं (एथेना, पोसाइडन) लेकिन कविता रोज़मर्रा की इंसानी चिंताओं (मेहमाननवाज़ी,वफ़ादारी,चालाकी) पर भी ध्यान देती है। आम घरेलू सीन के साथ ऊंचे-ऊंचे दैवीय कारनामों को मिलाना अजीब लग सकता था। यह इस थीम पर ज़ोर देता है कि इंसानी एजेंसी और दैवीय इच्छा आपस में जुड़ी हुई हैं। जिससे एपिक शानदार और रिलेटेबल दोनों बन जाता है। नैतिक उलझन ओडीसियस एक चालाक हीरो है लेकिन वह झूठ भी बोलता है,धोखा भी देता है और कभी-कभी बेरहमी से काम भी करता है। जैसे शादी के लिए अप्लाई करने वालों का कत्लेआम। पहले के महाकाव्यों में अक्सर हीरो को बेदाग मिसाल के तौर पर दिखाया जाता था। यह मुश्किल पढ़ने वालों को हीरो बनने के तरीके पर सवाल उठाने और चालाकी की कीमत पर सोचने के लिए उकसाती है। बढ़ा हुआ “घर वापसी” का क्लाइमेक्स आखिरी किताबें (21-24) जीत के साथ वापसी के बजाय शादी के लिए अप्लाई करने वालों से बदला लेने पर फोकस करती हैं।  कई महाकाव्य हीरो के जीत के साथ आने पर खत्म होते हैं। होमर उसके बाद की घटनाओं पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। यह पूरी कविता में बने तनाव का एक अच्छा हल देता हैं। जिसमें न्याय और व्यवस्था को फिर से बनाने पर ज़ोर दिया गया है। रिस्क क्यों कामयाब होता है ? वह जाने तो इमोशनल गहराई दर्शकों को कहानी को अलग-अलग एंगल से देखने का मौका देकर,कविता एक ज़्यादा बेहतर इमोशनल माहौल बनाती है। पेनेलोप का सब्र, टेलीमेकस का जवान होना और चाहने वालों का घमंड, ये सभी सेंट्रल हीरो के सफ़र में नई परतें जोड़ते हैं। नैरेटिव टेंशन नॉन-लीनियर फ्लैशबैक पढ़ने वालों को अंदाज़ा लगाने पर मजबूर करते हैं कि आगे क्या होगा। हर एपिसोड (साइक्लोप्स, सर्सी, सायरन, वगैरह) एक सेल्फ-कंटेन्ड एडवेंचर जैसा लगता है साथ ही बड़े आर्क में भी योगदान देता है। टाइमलेस थीम्स हिम्मत वाले स्ट्रक्चरल चॉइस यूनिवर्सल चिंताओं को हाईलाइट करते हैं। वफादारी,पहचान,किस्मत और फ्री विल के बीच संघर्ष,जिससे कविता हज़ारों सालों तक गूंजती है। लिटरेरी असर के मद्देनजर “बिग स्विंग” ने बाद के कामों के लिए एक मिसाल कायम की जो नैरेटिव फॉर्म के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं ।जैसे जेम्स जॉयस का यूलिसिस। होमर के जुए की सफलता ने दिखाया कि एपिक स्टोरीटेलिंग शानदार और इनोवेटिव दोनों हो सकती है। शॉर्ट में जब क्रिटिक्स कहते हैं कि"द ओडिसी" एक बड़ा कदम उठाती है और इसका फ़ायदा होता है तो वे होमर की पारंपरिक एपिक फ़ॉर्मूला को तोड़ने की इच्छा की तारीफ़ कर रहे होते हैं। एक टूटी-फूटी टाइमलाइन,कई नज़रियों, नैतिक बारीकियों और रोज़मर्रा के इंसानी ड्रामा पर फ़ोकस के ज़रिए फिर भी एक दिलचस्प,जुड़ी हुई कहानी पेश करते हुए। ये रिस्क कविता के इमोशनल असर को बढ़ाते हैं। इसके थीम को गहरा करते हैं और वेस्टर्न लिटरेचर की नींव के तौर पर इसकी जगह पक्की करते हैं। (Photos Courtesy Social media and AI)

~ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Fox Filmi News• Digital World• #क्रिस्टोफरनोलन #ChristopherNolan #दओडिसी #TheOdyssey #ओडिसी #Odyssey #नोलन #Nolan #नईफिल्म #NewMovie #फिल्मसमीक्षा #MovieReview #आईमैक्स #IMAX #मैटडेमन #MattDamon #ऐनीहैथवे #AnneHathaway #टॉमहॉलैंड #TomHolland #रॉबर्टपैटिंसन #RobertPattinson #चार्लीज़थेरॉन #CharlizeTheron #ज़ेंडेया #Zendaya #GreekMythology #ग्रीकपौराणिककथा #होमर #Homer #2026बड़ीफिल्म #2026BigMovie #सिनेमा #Cinema

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