*बोलीवुड फिल्म'काला हिरण' के मेकर्स ने दिल्ली हाई कोर्ट के टीज़र हटाने के आदेश के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*बोलीवुड फिल्म'काला हिरण' के मेकर्स ने दिल्ली हाई कोर्ट के टीज़र हटाने के आदेश के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) बोलीवुड के मैकर्स अमित जानी ने फिल्म के टीज़र को हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की है। फिल्म निर्माता अमित जानी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है जिसमें उनकी फिल्म''काला हिरण:द बैटल फॉर लेगेसी''का टीज़र हटाने का आदेश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि टीज़र ने सलमान खान के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन किया है। जिससे उनकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची है। जानी का तर्क है कि यह कलात्मक अभिव्यक्ति का उल्लंघन है।
बोलीवुड की आगामी फिल्म''काला हिरण –द बैटल फॉर लिगेसी''इसे''काला हिरण:द बैटल फॉर लीगल''भी कहा जाता है। दौरान कहा जाता है कि यह कहानी काले हिरण (ब्लैक-बक) के शिकार के उस पुराने मामले पर आधारित है जिसमें बॉलीवुड स्टार सलमान खान शामिल हैं। शामिल पक्ष में अमित जानी फिल्म के प्रोड्यूसर सलमान खान याचिकाकर्ता,जिनका दावा है कि टीज़र उनके पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) का उल्लंघन करता है और इससे उनकी लंबित कानूनी कार्यवाही पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश (27 जुलाई 2026) कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी कर मेकर्स को 24 घंटे के भीतर टीज़र और उससे जुड़े सभी प्रमोशनल मटीरियल सोशल- मीडिया पोस्ट, YouTube, पॉडकास्ट आदि को हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने माना कि टीज़र प्रथम दृष्टया prima facie सलमान खान के पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करता है और इससे उनकी प्रतिष्ठा को "ना-पूरा होने वाला नुकसान"हो सकता है। हाई कोर्ट के फैसले का आधार पर पर्सनैलिटी-राइट्स का दावा आरोप है कि टीज़र में खान के नाम उनके अंदाज़ और उनकी फिल्मों जैसे"दबंग","सिकंदर"का ज़िक्र उनकी मंज़ूरी के बिना किया गया था। निष्पक्ष सुनवाई पर खतरे के मद्देनजर टीज़र में एक"सुपरस्टार"के खिलाफ़ काले हिरण के कथित शिकार के लिए एक नाटकीय कोर्टरूम ट्रायल दिखाया गया है। एक्टर का तर्क है कि इससे राजस्थान हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे आपराधिक मामले पर बुरा असर पड़ सकता है। कमर्शियल फायदा उठाने को लेकर कोर्ट ने कहा कि टीज़र से ऐसा लगता है कि एक्टर की पहचान का इस्तेमाल कमर्शियल फायदे के लिए किया जा रहा है।
प्रोड्यूसर की प्रतिक्रिया देखें तो अमित जानी ने तर्क दिया कि यह फ़िल्म ऐसी जानकारी पर आधारित है । जो पहले से ही पब्लिक डोमेन में है और इसमें बिश्नोई समुदाय की वन्यजीव संरक्षण की कोशिशों पर ध्यान दिया गया है। हाई कोर्ट के आदेश में एक्टर की पर्सनैलिटी (व्यक्तित्व) के किसी खास"कानूनी कार्रवाई योग्य इस्तेमाल"का ज़िक्र नहीं है। अंतरिम रोक कलात्मक अभिव्यक्ति पर सेंसरशिप के बराबर है। जिससे सही पत्रकारिता,फ़िल्म-निर्माण या ऐतिहासिक कहानी कहने को दबाने के लिए पर्सनैलिटी-राइट्स के गलत इस्तेमाल को लेकर संवैधानिक चिंताएँ पैदा होती हैं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका (19 अगस्त 2026) प्रोड्यूसर ने दिल्ली हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश से राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। याचिका में तर्क दिया गया है कि एक्टर के दावे को मानने से पर्सनैलिटी- राइट्स का एक ऐसा हथियार बन जाएगा। जिससे कोई भी पब्लिक फ़िगर कानूनी कलात्मक या पत्रकारिता सामग्री के खिलाफ़ रोक लगाने वाले आदेश (गैग ऑर्डर) ले सकेगा। ऐसी मिसाल से स्वतंत्र फ़िल्म-निर्माण, पत्रकारिता और जनहित के मामलों के नाटकीय रूपांतरण पर बुरा असर पड़ेगा।
मुख्य कानूनी सवाल देखें तो पर्सनैलिटी राइट्स का दायरे के हिसाब से जब सामग्री जनहित के मामलों या लंबित कानूनी मुकदमों से जुड़ी हो तो किसी सेलिब्रिटी का अपनी छवि के कमर्शियल इस्तेमाल को नियंत्रित करने का अधिकार किस हद तक हो सकता है?अधिकारों में संतुलन के मद्देनजर कोर्ट को प्रतिष्ठा/व्यक्तित्व के अधिकार और अभिव्यक्ति की आज़ादी व जनता के सूचना के अधिकार के बीच कैसे संतुलन बनाना चाहिए?ट्रायल से पहले पब्लिसिटी के मुताबिक किसी नाटकीय टीज़र में असल ज़िंदगी के व्यक्ति को दिखाने से चल रही आपराधिक कार्यवाही पर किस हद तक बुरा असर पड़ सकता है?मौजूदा स्थिति के हिसाब से सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दर्ज कर ली है और इस बात पर दलीलें सुनेगा कि दिल्ली हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगाई जाए या उसमें बदलाव किया जाए। अभी तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं आया है। इसके व्यापक असर के मद्देनजर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इसका नतीजा इनके लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
भारतीय सेलिब्रिटीज से जुड़े भविष्य के पर्सनैलिटी- राइट्स से जुड़े मुकदमे । तेज़ी से डिजिटल प्रसार के दौर में कलात्मक अभिव्यक्ति और मानहानि के बीच की सीमा हाई-प्रोफाइल मामलों में कोर्ट ट्रायल से पहले पब्लिसिटी को कैसे संभालते हैं। काला हिरण के मेकर्स दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रहे हैं जिसमें उनके टीज़र को हटाने के लिए कहा गया है। उनका तर्क है कि यह आदेश क्रिएटिव आज़ादी का उल्लंघन करता है और पर्सनैलिटी-राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) के दावों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला यह तय करेगा कि भारतीय कानून किस तरह सेलिब्रिटी के अपनी छवि की सुरक्षा के अधिकार और अभिव्यक्ति की आज़ादी व निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार जैसे व्यापक जनहित के बीच संतुलन बनाता है।(Photos Courtesy Social media and AI)
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