*बॉलीवुड का बिजनेस मॉडल संकट में:सिंगल स्क्रीन का अंत,मल्टीप्लेक्स का दबदबा और OTT की चुनौती*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*बॉलीवुड का बिजनेस मॉडल संकट में:सिंगल स्क्रीन का अंत,मल्टीप्लेक्स का दबदबा और OTT की चुनौती*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई) बॉलीवुड उद्योग आज अपने सबसे बड़े बिजनेस मॉडल संकट से गुजर रहा है। जहां एक ओर फिल्मों की कमाई के आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर हैं। वहीं दूसरी ओर सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल बंद हो रहे हैं। दर्शकों की संख्या घट रही है और OTT प्लेटफॉर्म थिएटर व्यवसाय के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। आमिर खान और जावेद अख्तर जैसे दिग्गजों ने हाल ही में इस संकट पर खुलकर बात की है और उद्योग को सुधार की सलाह दी है। सिंगल स्क्रीन के लगातार होता अंत के मद्देनजर भारत में सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल की संख्या में भारी गिरावट आई है। साल1995 में देश में 23,500 सिंगल स्क्रीन थे। जो साल 2005 में घटकर 12,500, साल 2015 में 9,500 और साल 2025 तक मात्र 6,500 रह गए। मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में अब केवल 45-50 सिंगल स्क्रीन ही कार्यरत हैं। जबकि लगभग125 हॉल बंद हो चुके हैं। इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं।
उच्च संपत्ति कर,बिजली के बढ़े हुए दरें,लाइसेंस नवीनीकरण की जटिल प्रक्रिया और मल्टीप्लेक्स को मिलने वाली टैक्स छूट जो सिंगल स्क्रीन को नहीं दी गई थी। सिनेमा मालिकों का कहना है कि मल्टीप्लेक्स को 5 साल की टैक्स होलीडे मिली थी। जिससे उन्हें15-20 करोड़ रुपए की बचत हुई जबकि सिंगल स्क्रीन को यह सुविधा नहीं दी गई थी। FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत के 19,500 पिन कोड में से केवल 3,150 में ही सिनेमा हॉल हैं। भारत में स्क्रीन डेंसिटी 6.8 स्क्रीन प्रति 10 लाख जनसंख्या है। जो अमेरिका (109), यूके (66), फ्रांस (95) और चीन (64) की तुलना में बेहद कम है। मल्टीप्लेक्स का बढ़ता दबदबा और बदलता दर्शक वर्ग के मुताबिक मल्टीप्लेक्स के आगमन ने फिल्म उद्योग के समीकरण पूरी तरह बदल दिए थे।
जहां सिंगल स्क्रीन पर टिकट 50-100 रुपए के होते थे। वहीं मल्टीप्लेक्स में टिकट 200-300 रुपए से शुरू होकर प्रीमियम शो के लिए 1500 रुपए तक हो सकते हैं। एक परिवार के लिए मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने का खर्च 4000- 5000 रुपए तक पहुंच सकता है। आमिर खान ने स्पष्ट कहा है कि बॉलीवुड मल्टीप्लेक्स फिल्मों पर ज्यादा फोकस कर रहा है। जबकि दक्षिण भारतीय फिल्में आज भी सिंगल स्क्रीन के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि साउथ फिल्में वही हैं। जिन्हें हम सिंगल स्क्रीन फिल्म कहते थे। बहुत मास, बहुत रूटेड। शायद बॉलीवुड मल्टीप्लेक्स फिल्मों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। OTT का बढ़ता खतरा और होल्डबैक राइट्स के मद्देनजर सबसे बड़ा संकट OTT प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव से पैदा हुआ है।
आमिर खान ने चिंता जताते हुए कहा कि हम अपने उपभोक्ताओं को बता रहे हैं कि आप हमारा प्रोडक्ट देखने आ सकते हैं अगर नहीं आते तो हम इसे 8 हफ्ते में OTT पर ला देंगे। जहां यह मुफ्त होगा क्योंकि आप पहले ही सब्सक्रिप्शन के माध्यम से इसके लिए भुगतान कर चुके हैं। मुझे नहीं पता कि एक प्रोडक्ट को दो बार कैसे बेचा जाता है। जावेद अख्तर ने कम से कम 3-4 महीने के अंतराल की सिफारिश की है। जबकि वर्तमान में हिट फिल्में भी 4 हफ्तों में OTT पर आ जाती हैं। FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में 500 फिल्में OTT पर रिलीज हुईं। जिनमें से केवल 30 सीधे डिजिटल रिलीज थीं। फिल्म''भूल चुक माफ''का मामले को लेकर OTT- थिएटर विवाद की मिसाल के हिसाब से हाल ही में ''भूल चुक माफ''फिल्म को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी मामला सामने आया। मैडॉक फिल्म्स ने फिल्म के थिएट्रिकल रिलीज से एक दिन पहले इसे रद्द कर OTT पर सीधे रिलीज करने का फैसला किया।
PVR INOX ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसने 8 सप्ताह की होल्डबैक अवधि समाप्त होने तक फिल्म के OTT रिलीज पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि मैडॉक फिल्म्स का निर्णय"व्यावसायिक गणना"से प्रेरित था। न कि सुरक्षा चिंताओं से और एक बाध्यकारी समझौते से मुकरना सही नहीं है। इस फैसले ने थिएटर-OTT विंडो के महत्व को रेखांकित किया और प्रोडक्शन हाउसों को चेतावनी दी कि वे थिएटर वालों के साथ किए गए समझौतों की अनदेखी न करें । कमाई बढ़ी पर दर्शक घटे यह विरोधाभासी स्थिति के मद्देनजर साल 2025 में भारत का बॉक्स ऑफिस 13,300 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। जो पिछले वर्ष की तुलना में 13% अधिक है लेकिन यह कमाई टिकट की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है। न कि दर्शकों की संख्या बढ़ने से। 2025 में कुल 868 मिलियन दर्शकों ने सिनेमा देखा।
जो पिछले वर्ष से मात्र 1% अधिक है। साल 2010-2020 के बीच प्रति स्क्रीन औसत वार्षिक दर्शक संख्या 110,000 थी। जो अब 20% कम होकर लगभग 86,000-87,000 रह गई है। सिनेपोलिस इंडिया के MD के अनुसार यह 110,000 का आंकड़ा वापस नहीं आएगा। अब दर्शक अधिक चयनात्मक हैं। कम बार सिनेमा जाते हैं लेकिन प्रति विजिट अधिक खर्च करते हैं दौरान दक्षिण भारत में गिरावट का मामला देखें तो दक्षिण भारतीय राज्यों में भी स्क्रीन काउंट में गिरावट आई है। FICCI-EY रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत में साल 2025 में स्क्रीन की संख्या 1% घटी। जबकि बाकी भारत में 3% बढ़ोतरी हुई।
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक ने मिलकर 100 से अधिक स्क्रीन खो दिए हैं। तेलुगु सिनेमा के दर्शकों (फुटफॉल) की संख्या साल 2025 में 18.1 करोड़ थी। जो लगातार दूसरे साल घटी है। तमिल सिनेमा का बॉक्स ऑफिस साल 2024 की तुलना में 1% कम और साल 2023 की तुलना में 8% कम रहा था। जबकि फुटफॉल में 15% से अधिक की गिरावट आई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड कमाई के मद्देनजर शाहरुख खान,आमिर खान और सलमान खान की फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में शानदार कमाई की है। "दंगल"1521 करोड़,"सीक्रेट सुपरस्टार"822.92 करोड़ और"बजरंगी भाईजान" 482.54 करोड़ रुपए विदेशों से कमा चुकी हैं। रणवीर सिंह की''धुरंधर''ने 291 करोड़ रुपए विदेशों में कमाए। जो साल 2025 की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय कमाई है। फिल्म"सीक्रेट सुपरस्टार"ने 15 करोड़ के बजट में बनी और भारत में 63 करोड़ कमाए लेकिन अकेले चीन से 863 करोड़ रुपए कमाए थे। यह आंकड़ा बताता है कि इंटरनेशनल मार्केट कितना बड़ा अवसर है लेकिन यह भी कि भारतीय दर्शकों तक फिल्मों की पहुंच कितनी सीमित होती जा रही है। क्या बॉलीवुड अपनी बिजनेस साइकिल ठीक कर पाएगा? वह देखें तो आमिर खान ने कहा कि यह एक चक्र की तरह है।
आप गलतियाँ करते हैं और फिर सुधार करते हैं। जावेद अख्तर ने चेतावनी दी कि हम जल्दी समझ जाएं तो अच्छा है। नहीं तो हमारी साइकिल ही बिक जाएगी। सिंगल स्क्रीन के बंद होने से मल्टीप्लेक्स के दबदबे और OTT की चुनौतियों के बीच बॉलीवुड को अपने बिजनेस मॉडल पर गंभीरता से विचार करना होगा। दक्षिण भारतीय फिल्मों से सीख लेकर और सिंगल स्क्रीन दर्शकों को फिर से जोड़कर ही उद्योग अपनी खोई हुई पहुंच (रीच) को पुनः प्राप्त कर सकता है। बॉलीवुड का बदलते बिजनेस और सिंगल स्क्रीन के बंद होने से OTT तक का सफर के दौरान
बॉलीवुड फिल्म उद्योग का व्यापारिक मॉडल पिछले कुछ वर्षों में पूरी तरह से बदल गया है। कभी देशभर में 12,000 सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल हुआ करते थे, लेकिन 2019 तक यह संख्या घटकर मात्र 6,500 रह गई। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह मल्टीप्लेक्स का आगमन रहा, जिसने न केवल फिल्मों की कमाई के समीकरण बदले, बल्कि दर्शकों की पहुंच को भी सीमित कर दिया।
मल्टीप्लेक्स के बढ़ते दबदबे के मद्देनजर जब मल्टीप्लेक्स भारत में आए तो प्रोडक्शन हाउस को जल्द ही समझ आ गया कि महंगे टिकट (200 रुपए) वाले मल्टीप्लेक्स में कम दर्शक भी सिंगल स्क्रीन (50 रुपए टिकट) के लाखों दर्शकों के बराबर कमाई करा सकते हैं। यही कारण है कि आज 300 करोड़ क्लब सामान्य बात हो गई है लेकिन इसकी कीमत सिंगल स्क्रीन के बंद होने के रूप में चुकानी पड़ी। स्टार पावर और अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से शाहरुख खान की 14 से अधिक फिल्मों ने अकेले अंतरराष्ट्रीय बाजार से 10 मिलियन डॉलर (50-100 करोड़ रुपए) से अधिक की कमाई की है। साल 2015 में बनी''दिलवाले''जैसी फिल्म ने 74 करोड़ के बजट में बनकर विदेशों से 170 करोड़ रुपए कमाए। वहीं ''सीक्रेट सुपरस्टार''ने 15 करोड़ के बजट में भारत में 63 करोड़ तो कमाए लेकिन अकेले चीन से 863 करोड़ रुपए की कमाई करके इंटरनेशनल मार्केट की ताकत दिखा दी। OTT के बढ़ते खतरे के मद्देनजर आमिर खान ने हाल ही में इस बदलाव पर चिंता जताते हुए कहा कि मुझे नहीं पता कि किसी प्रोडक्ट को दो बार कैसे बेचा जाए?उन्होंने फिल्मों को जल्दी OTT पर लाने के बिजनेस मॉडल पर सवाल उठाया। जब कोई फिल्म फ्लॉप होती है तो उसे जल्दी OTT पर ला दिया जाता है। जिससे उसकी Hold Back Rights थिएटर रिलीज और OTT रिलीज के बीच का समय कम हो जाती है। आमिर खान के अनुसार कम से कम 3-4 महीने का अंतराल होना चाहिए। जबकि फिलहाल यह अवधि 4-8 सप्ताह की है। बदलते दर्शक वर्ग को लेकर समझे तो सिंगल स्क्रीन के बंद होने का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि छोटे शहरों और गांवों के लोग सिनेमा से दूर हो गए।
आज शायद ही कोई रिक्शा चालक या मजदूर मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखता दिखे। इससे बॉलीवुड की पहुंच (रीच) सीमित हो गई है हालांकि कमाई पहले जितनी ही हो रही है। दौरान दक्षिणी फिल्मों से सीखें। जावेद अख्तर और आमिर खान दोनों ने माना कि बॉलीवुड को दक्षिणी फिल्मों से सीखना चाहिए। जो आज भी सिंगल स्क्रीन के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।''पठान'',''गदर 2''और ''जवान''जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि सही कंटेंट हो तो सिंगल स्क्रीन पर भी शानदार कमाई हो सकती है।(Photos Courtesy Social media and AI)
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